बिलासपुर, वन विभाग में जिस मापदंड से तयशुदा निर्माण कार्य कराया जाना चाहिए वहां अगर खुद विभाग के ही रेंजर चंद अपने लालच से अनुभवहीन ठेकेदार से काम कराए तो उस काम की गुणवत्ता खाक रहेगी। पूरा मामला है कटघोरा वनमंडल अंतर्गत वन परिक्षेत्र जड़गा में हुए कैम्पा मद से एनीकट निर्माण कार्य जारी है जिसमे विभागीय रेंजर पूरी तरह से ठेकेदार को मनमानी करने खुली छूट दे रखी है खुली छूट का प्रमुख कारण निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार का सत्ताधारी दल में राजनैतिक रसूख होना बताया जा रहा है वही रेंजर अपने चंद कमीशन के स्वार्थ में पूरा निर्माण गुणवत्ताहीन करने फ्री हैंड छोड़ दिया गया है।विभागीय बड़े अधिकारी इस एनीकट के निरीक्षण में साइड आना उचित नही समझ रहे है।
यह भी बताते चले इस एनीकट निर्माण में जिस छड़ का उपयोग किया जा रहा है वो स्टीमेट अनुसार नही लगाया गया।जिसमें ही ठेकेदार व रेंजर मिलकर लंबा खेल खेल रहे है निर्माण बाद यह तकनीकी विसंगतियां किसी की भी समझ से परे रहता है। निर्माण में रेत का उपयोग किया जा रहा उस रेत में मिट्टी की भारी मात्रा है जिसे सैम्पल कराने में शायद यह घटिया काम ना हो पाता। स्टीमेट में तय मापदंड अनुसार नीव की खुदाई नही की गई है नीव मात्र दो ढाई फ़ीट ही खोद स्लैब कर दिया गया है। जब जड़ यानी नीव ही ढीली हो तो उस पूरे एनीकट की मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है।अब ऐसे एनीकट निर्माण के मजबूती पर सवालिया निशान तो लगने ही है पर कहावत है “सैय्या भये कोतवाल तो डर काहे का”। जब शासन मेरा और चंद कमीशन के स्वार्थ में प्रशासन भी मेरा तो परवाह किसकी?

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श्रम कानून का उल्लंघन, नाबालिग कार्यरत
इस पूरे काम मे नाबालिग बच्चों को ठेकेदार काम पर लगा रखे है। कहा है श्रम विभाग?कहा है उनका कानून? चंद पैसों की लालच में गांव के ही नाबालिग बच्चे इस जोखिम भरे कार्य मे लगे है ठेकेदार इन नाबालिगों से कम भुगतान में अपना काम निकाल रहा हैं। नाबालिग से काम लेना अपने आप मे एक संगीन अपराध के दायरे में है मगर दुर्भाग्य ही कहा जाय नाबालिगों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे ठेकेदार पर ना विभाग अंकुश लगा रहा है और न ही श्रम विभाग।

स्टीमेट दो का निर्माण हो रहे दर्जन भर एनीकट
नाम ना सामने लाने की शर्त में विभागीय पड़ताल में यह भी जानकारी सामने आयी कि जड़गा वन परिक्षेत्र में मात्र दो एनीकट का स्टीमेट तैयार किया गया है शेष की जानकारी स्पष्ट नही है यानी नाम मात्र स्टीमेट दिखाकर शेष निर्माण बिना स्टीमेट के ही कराये जा रहे है। बिना ठेकेदार से विभागीय मिलीभगत क्या यह संभव हो पायेगा?

गुणवत्ता की अनदेखी, नही किया निरीक्षण

पूरे निर्माण कार्य मे जहां एक ओर ठेकेदारों के द्वारा गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है वही दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी नही किया गया।क्या यह निरीक्षण करने कटघोरा वनमंडल के एसडीओ की जवाबदेही नही?लेकिन उनके द्वारा ग्रामीणों के बताए अनुसार कभी निरीक्षण नही किया गया।
भारी भरकम हो रहे एनीकट निर्माण में अब आने वाला समय ही बतायेगा कि ऐसे गुणवत्ताहीन एनीकट निर्माण के लिए क्या कोई जांच होगी? या आगे भी इसी ढर्रे से ही काम चलता रहेगा।

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By Admin

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