रायपुर, 21 नवंबर

वर्तमान समय में मनुष्य चारित्रिक संकट के भीषणतम दौर से गुजर रहा है। मानवीय मूल्यों में निरंतर आ रही गिरावट से आस्थाएं समाप्त होती जा रही हैं। मनुष्य अपने स्वार्थ का पर्याय बनकर रह गया है। स्वार्थ की साधना में लिप्त मनुष्य स्वार्थ साधना को ही अपने जीवन का मूल मंत्र मान बैठा है। जबकि स्वार्थ की ये साधना पारिवारिक, धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीयता को घुन की तरह अंदर ही अंदर खोखला कर दे रही है।

दूसरे को गिराकर कभी ऊंचा नहीं उठोगे

ये सद्विचार संत शिरोमणि महाराज श्री रावतपुरा सरकार ने अपने दिव्य मुख से व्यक्त किये हैं। धनेली स्थित श्री रावतपुर सरकार आश्रम में महाराज श्री रावतपुरा सरकार ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति का स्वार्थ और उसका लोभ ही चरित्रहीनता का कारण है। चरित्र का अर्थ है, मानवता के प्रति निष्ठा, मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता। जब एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य के प्रति प्रेम, सहानुभूति और सहकारित का भाव होता है, तब ये भावना मानवीय मूल्य या मानवता कहलाती है। वर्तमान दौर में मनुष्य दूसरे की टांग खींचकर आगे जाना चाहता है। लेकिन इस टांग खिंचाई की शैली को अपनाकर कोई भी मनुष्य कभी ऊंचा नहीं उठ सकता है। महाराज श्री रावतपुरा सरकार ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने स्वंय को गिराकर दूसरों को उठाया, वही लोग आज वन्दनीय, पूजनीय और महापुरुष कहलाए हैं। समझ नहीं आता है कि आज का मनुष्य इतना मतलबी, इतना स्वार्थी क्यों है। भारतवर्ष की संस्कृति ऐसी तो कतई नहीं थी। सर्वश्रेष्ठ भारतवर्ष में नैतिकता, त्याग, तपस्या, समर्पण, बलिदान और आध्यात्म की गंगा अविरल बहती रही है। फिर इस सब के बावजूद मनुष्य के जीवन में नैतिक मूल्यों का उच्च मानवीय आदर्शों का अभाव क्यों है।

चरित्र के बिना  धर्म सिर्फ दिखावा

सद्गुरु ने कहा कि वर्तमान का व्यक्ति चाहता है कि दूसरे सभी लोग सच्चे और ईमानदार हों, सिर्फ हमें ही झूठ और बेईमानी की छूट मिल जाए। सद्गुरु श्री रावतपुरा सरकार ने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि हमारा प्यारा भारत देश अपनी सभी विषमताओं, परेशानियों को हल करते हुए विश्व के भाल पर यशस्वी बनकर उभरे तो सबसे अधिक हमें भारतवासियों के चरित्र निर्माण पर बल देना होगा। चरित्र के अभाव में सब कुछ व्यर्थ है। इसके बिना विकास और उन्नति की सभी बातें कोरी बकवास से अधिक कुछ नहीं है। चरित्र के बिना धर्म भी केवल दिखावा और पाखंड है। इसलिये जागो और अपने चरित्र का निर्माण करो।

 

 

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