रायपुर, छत्तीसगढ़ के हिल स्टेशन मैनपाट में शनिवार को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन हर्ष-उल्लास के साथ बड़े धूमधाम से मनाया गया।

तिब्बत पर 1955 में चीनी ने आक्रमण करके तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को देश निकाला दे दिया था। तब भारत सरकार ने उन्हें आश्रय दिया था। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तब काफी संख्या में तिब्बतियों ने अपने धर्म गुरु के साथ शरण ली थी। धीरे धीरे भारत के अन्य स्थानों पर बसाया गया था। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के जबलपुर और सरगुजा वर्तमान छत्तीसगढ़ के मैनपाट में 1963 में तकरीबन एक- एक हजार तिब्बतियों को कैम्प बनाकर रखा गया था। इसके साथ ही दक्षिण भारत में एक और शरण स्थली, इस तरह भारत मे कुल चार स्थानों पर तिब्बती लोगो बसाया गया था। छत्तीसगढ़ के मैनपाट में इनकी संख्या तकरीबन 3 से 4 हजार के बीच है।

शनिवार को सुबह शहर में रंग-बिरंगे परिधानों में अपने धर्मगुरु के सम्मान में इन तिब्बती लोगों ने एक रैली की शक्ल में शोभा यात्रा निकाली जो शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए उनके बौद्ध मंदिर में जाकर खत्म हुई। तिब्बतियों की इस रैली को देखकर लगता था, कि मानो कुदरत ने अपनी इंद्रधनुषी चादर मैनपाट के ऊपर डाल दी थी।

दिनभर के सामाजिक कार्यक्रमो में शरीक में दिनभर उत्सव मनाने के बाद पारंपरिक परिधानों में सु-सप्त लोगों के साथ “जीवित देवता” के रूप में पूजनीय दलाई लामा की प्रार्थना में भाग लिया और आशीर्वाद प्राप्त किया, इसके अलावा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें तिब्बतियों ने अपने अदाकारी के जलवे बिखेरे।

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