रायपुर, 18 मई, 2019

भगवान हनुमान जी का जन्म स्थान कहां हैं ? ये ऐसा सवाल है, जिसका उत्तर कई लोग नहीं जानते हैं। लेकिन आज हम एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां हनुमान जी के जन्म स्थान का दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया जा सकता है।

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित टिहरका गांव हनुमानजी का जन्म स्थान है। पौराणिक मान्यता है कि टिहरका गांव की पवित्र धरा पर चैत्र शुक्ल पक्ष दिन मंगलवार को मारुतिनंदन का जन्म हुआ।

अंजनी माता अपने पति केसरी के साथ सुमेरु पर्वत पर निवास करती थीं। जब कई सालों तक माता अंजनी को संतान प्राप्ति नहीं हुई तो मतंग ऋषि के कहने पर टिहरका गांव के पर्वत पर उन्होंने करीब 7 हजार सालों तक निर्जल तप किया, तब से अब तक बिल्व की आकृति का पर्वत वहां अडिग खड़ा हुआ है। मान्यता है के सुमेरु पर्वत के नीचे भगवान महादेव का धाम भी है। यहां माता अंजनी तपस्या करके पूर्व दिशा में स्थित आकाश गंगा में स्नान करती थीं, वे दोनों कुंड इस गांव में आज भी मौजूद हैं। इन कुंड का पानी कभी नहीं सूखता है।

हनुमानजी के जन्म को लेकर इसी गांव से जुड़ी एक और किवदंती प्रचलित है।  कहा जाता है कि जिस यज्ञ से भगवान राम का जन्म हुआ था, उसी यज्ञ के प्रसाद से हनुमान जी का भी जन्म हुआ। जब राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया था, तब  यज्ञ के बाद ऋषि वशिष्ठ ने चारों रानियों को खीर का प्रसाद दिया था। इसी दौरान कैकई के  हाथ से प्रसाद का कुछ भाग छीनकर एक चील ले गई। रास्ते में तूफान के कारण उस चील के हाथ से प्रसाद गिर गया, उसी समय पवन देव ने पर्वत पर तपस्या कर रही माता अंजनी के हाथ पर वह प्रसाद डाल दिया। जैसे ही माता ने वह प्रसाद ग्रहण किया, हनुमान जी गर्भ में आ गए और इस तरह से टिहरका गांव में हनुमानजी का जन्म हुआ।

टिहरका गांव में बने प्राचीन मंदिर में बाल हनु्मान के साथ माता अंजनी की पांच मूर्तियां विराजित हैं। कहते हैं कि हनुमानजी के जन्म लेने के बाद शेषनाग उनके दर्शन के लिए आए थे। यहां बाल हनुमान और शेष नाग की मूर्ति भी दर्शन देते है।

मान्यता है कि जब आपके जीवन में संकट के बादल छाने लगें और दुख का पहरा जीवन पर होने लगे तब टिहरका धाम पर आकर सच्चे मन से प्रार्थना करने से हनुमान जी सारे कष्टों को हर लेते हैं।

 

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