मुंगेली, 27 सितंबर

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही छत्तीसगढ़ की जनता ने ये उम्मीद जताई थी कि राज्य में पहली बार बनी छत्तीसगढ़िया सरकार उनका ख्याल रखेगी, उनको सहूलियत देगी और उनके हित के काम करेगी। छत्तीसगढ़ की 90 फीसदी एससी, एसटी और ओबीसी आबादी के हितैषी होने का दावा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कई मंचों से कई बार कर चुके हैं। लेकिन उनकी ही सरकार में एक आदिवासी महिला पुलिस अफसर को छुटभैय्ये नेताओं ने इस कदर प्रताड़ित कर दिया है कि उनके दबाव में आकर मुंगेली के एसपी ने आदिवासी महिला पुलिस अफसर को थाना इंचार्ज के पद से हटाकर उन्हें महिला सेल का प्रभारी बनाकर एक कमरे में बिठा दिया है।

ये आदिवासी महिला कोई और नहीं बल्कि लोरमी की थाना प्रभारी रहीं कविता धुर्वे हैं। वही कविता धुर्वे जिनके साहस और नागरिकों के प्रति कर्तव्य को देखते हुए पूर्व एसपी पारुल माथुर, एडीजी अजय यादव, आईपीएस दिपांशु काबरा, आईजी जीपी सिंह जैसे बड़े अधिकारी उनकी तारीफ कर चुके हैं। लोरमी थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए कविता धुर्वे ने स्थानीय वसूली गैंग चलाने वाले कई छुटभैय्ये नेताओं को कानून का ककहरा सिखा दिया था। उनके फील्ड में रहने के दौरान अपराधियों की हिम्मत नहीं हुई कि वारदात को अंजाम दे सकें। लेकिन बीते कुछ समय से कविता धुर्वे अपने परिजनों की खराब हुई सेहत के चलते 12 सितंबर से लगाातार छुट्टी पर चल रही हैं, उनको परिजनों के इलाज के लिए हैदराबाद से रायपुर तक का सफर करना पड़ रहा है, लेकिन इसी बीच फील्ड से उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर पहले से खुन्नस खाये बैठे कुछ आपराधिक किस्म के वसूलीबाजों ने जिले में ऐसी वारदातों को अंजाम दे डाला, जिसे लोरमी और मुंगेली की खराब होती कानून व्यवस्था से जोड़ कर पेश किया गया। चेन स्नैचिंग की एक वारदात को सर्वदलीय मंच नाम के एक सामाजिक संगठन ने आदिवासी महिला टीआई कविता धुर्वे के खिलाफ इतना प्रचारित प्रसारित किया कि एसपी साहब आनन-फानन में उनका तबादला कर बैठे।

आदिवासी महिला टीआई को फील्ड से हटाकर सर्वदलीय मंच के लोग बेहद खुश हैं और इसे अपनी जीत के तौर पर ले रहे हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सर्वदलीय मंच में शामिल कुछ लोगों पर पूर्व में अवैध वसूली, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को प्रताड़ित करने के आरोप लग चुके हैं। इस मंच में कुछ खास किस्म के समर्थक, मेडिकल स्टोर्स संचालक, जमीन के अवैध कारोबारी और नेता बनने की तैयारी कर रहे कुछ व्यापारी समाज सेवा का चोला ओढ़े हुए हैं।  स्वार्थपूर्ति के लिए तैयार हुए इस मंच के सदस्यों को जब भी ये लगता है कि फलां प्रशासनिक अथवा पुलिस अधिकारी की वजह से उनकी दुकान नहीं चल पा रही है, फौरन उसके खिलाफ माहौल बनाना शुरु कर दिया जाता है। प्रशासन की छवि पर दाग न लगे और सरकार की डांट का कोपभाजन न होना पड़े, इससे बचने के लिए बड़े अफसर ट्रांसफर को ही पहला कदम मानते हैं। लेकिन इससे समस्या का हल नहीं होता है। प्रदेश के पुलिस कर्मचारी, अफसर पहले से ही ड्यूटी के तनाव का सामना कर रहे हैं। इसी तनाव को कम करने के लिए पुलिस कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देने का फैसला किया जा चुका है। साप्ताहिक अवकाश के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।

महिला टीआई के आने केबाद से ही छटपटा रहा था वसूली गैंग:-

महिला टीआई कविता धुर्वे के लोरमी में पदस्थ होने के बाद से सर्वदलीय मंच नाम के गैंग की मनमानियों पर अंकुश लगता चला गया। यही कारण है, की आकस्मिक अवकाश पर चल रही आदिवासी महिला टीआई को कानून व्यवस्था के झूठे मामले में उलझाकर अन्यत्र हस्तांतरित पुलिस प्रशासन पर जोर डाला गया है। वसूली गैंग को डर है, कि अगर महिला टीआई अवकाश से वापस आ गईं तो उनके खिलाफ चल रहे मामलों की फाइल फिर से खुल जाएगी।

महिला टीआई 12 सितंबर से है,अवकाश पर
आदिवासी महिला टीआई कविता धुर्वे अपने पति की गिरती सेहत की वजह से उनके इलाज के लिए 12 सितंबर से अवकाश पर हैं, उन्हें पति के इलाज के लिए बार-बार हैदराबाद आना-जाना पड़ रहा है। इसी का फायदा उठाकर कुछ आपराधिक किस्म के लोगों ने एकाएक शहर में चोरी-चकारी और चेन स्नैचिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे डाला। चोरी की घटनाओं को मुद्दा बनाकर वसूली गैंग समाज सेवा के नाम पर सड़कों पर उतरा और प्रशासनिक अफसरों पर राजनीतिक दबाव बनवाकर कविता धुर्वे को लोरमी थाना प्रभारी पद से हटवाकर मुंगेली में महिला परामर्श केन्द्र का प्रभारी बना दिया गया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आदिवासी महिला टीआई की मनोस्थिति और परिस्थिति के बारे में एक बार भी नहीं सोचा गया। यहां तक कि आदिवासी महिला पुलिस अधिकारी के छुट्टी पर रहने के दौरान ही उनका तबादला आदेश जारी कर यह दर्शाता है कि मुंगेली जिले का स्थानीय प्रशासन कुछ छुटभैय्ये गैंगों के कितने दबाव में काम कर रहा है। कुछ कांग्रेस के नेताओं द्वारा थाना प्रभारी कविता धुर्वे को हटाने के इस विवरण को सुनियोजित बताया गया है।

सत्ता पक्ष के लोगो में प्रमुख रूप से जिला पंचायत उपाध्यक्ष शत्रुहन सोनू चंद्राकर, नंदकिशोर वैष्णव, मायारानीसिंह, जवाहर साहू, नंदकिशोर त्रिपाठी, राहुल सिंह ने अनेको कांग्रेसी प्रमुखों ने बताया कि थाना प्रभारी कविता धुर्वे के अनुपस्थिति में कुछ लोगो द्वारा उठापठक की हवा निकाल रहे हैं।लोरमीसे थाना प्रभारी कविता धुर्वे को हटाने जैसे प्रयास की निंदा करते हुए शीघ्र ही कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल द्वारा पुलिस अधीक्षक मुंगेली को वस्तुस्थिति से अवगत कराने की बात कही।

आदिवासी महिला टीआई ने सुलझाए थे कई अहम केस

लोरमी थाना प्रभारी के पद पर तैनात रहने के दौरान कविता धुर्वे ने बहुचर्चित झझपुरी कांड को सुलझाने में विशेष भूमिका निभाई थी।इस घटना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के झझपुरी पहुंचने के दौरान पुलिस वाहनों पर जमकर पथराव हुआ था। लेकिन इस दौान थाना प्रभारी कविता धुर्वे ने अदम्य साहस दिखाते हुए सप्ताह भर तक गांव में मोर्चा संभाले रखा।

इस संबंध में प्रदेश के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि इस संबंध में पूरे मामले की जांच स्वयं पुलिस अधीक्षक से कराउंगा लोरमी मे हुए नाटकीय घटनाक्रम की जानकारी मुझे पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से मिली है जांच कराउंगा।

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