रायपुर,

भारतीय सनातन संस्कृति की पहचान रहा योग, विश्व बाजार में भारी मुनाफा देने वाला ब्रांड बन चुका है। अब वो दिन लद गए जब योग को भारतीय पुरातन संस्कृति की पहचान और ऋषि मुनियों की देन माना जाता था। बल्कि अब योग को विश्व बाजार में 5.45 लाख करोड़ का मुनाफा देने वाले उद्योग के रूप में पहचाना जाता है। अकेले भारत में योग के नाम पर 2.5 हजार करोड़ का कारोबार सिर्फ योग की ट्रेनिंग देने के नाम पर हो रहा है।

कपाल भाति, अनुलोम-विलोम, सांस के अंदर-बाहर खींचने- निकालने की प्रक्रिया को समझाते समझाते योग शेयर बाजार को भी शीर्षासन कराने लगा है। भारत में योग के नाम पर आयोजित होने वाले प्रशिक्षण और ट्रेनिंग शिविरों में सबसे ज्यादा माल बटोरने का काम पतंजलि योग ट्रस्ट और बाबा रामदेव कर रहे हैं।

हाल ही में मिले आंकड़ों के मुताबिक बीते चार सालों में एक दिन का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के नाम पर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार 100 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।

योग के नाम पर खर्च का साल दर साल का आंकड़ा देखें तो

21 जून 2015 को 16.40 करोड़ रुपये खर्च हुए

21 जून  2016 को 18.1 करोड़ रुपये खर्च हुए।

21 जून 2017 को 26.42 करोड़ रुपये खर्च हुए।

21 जून  2018 को 36.8 करोड़ रुपये

एक दिन के योग पर मोदी सरकार द्वारा खर्च किए गए। इसमें योग शिविर, कॉरपोरेट्स कंपनियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग, प्राइवेट ट्रेनिंग और योग के नाम पर हुई पब्लिसिटी का खर्च  शामिल है।

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योग या योगा अब सिर्फ स्वास्थ्य का विषय नहीं रहा। राजनीति से गलबहियां करते हुए यह एक विराट विश्व-ब्रॉन्ड का रूप ले चुका है। अकेले अमेरिका महाद्वीप में योग के नाम पर 69 हजार करोड़ का कारोबार हुआ है। योग से जुड़े उत्पाद इन दिनों भारतीय बाजार में छाए हुए हैं। योग के साथ ही आयुर्वेद और खादी जैसे देसी उत्पाद का भी क्रेज बढ़ गया है।

योग एक्सेसरीज का बाजार भी विस्तार ले रहा है। इसका बाजार अरबों रुपए से अधिक का हो चुका है। योग करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। योग के लिए चटाई से लेकर जूते, सीडी, डीवीडी, बैंड, किताबों की भी मांग बढ़ी है। ई-कॉमर्स कंपनिया स्पेशल योग थीम स्टोर ले आई हैं। दुनिया में योग सीखने वाले लोगों की संख्या करीब 20 करोड़ है। इसके साथ ही योग टीचर्स की मांग सालाना 35 प्रतिशत की दर से बढ़ती जा रही है।

भारत में  ट्रेंड योग प्रशिक्षक प्रति घंटे डेढ़ हजार रुपये तक फीस ले रहे हैं। रिटेल के साथ ही ऑनलाइन मार्केट में योग से जुड़े उत्पादों की बिक्री हो रही है। अमेजॉन, फ्लिपकार्ट के अलावा प्रयोग, भू-सत्व, फॉर एवर योग, अर्बन योग जैसी नई कंपनियां योग से जुड़े उत्पाद की ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं। बाजार में इन दिनों आयुर्वेदिक उत्पादों की भी मांग तेजी से बढ़ी है।

च्यवनप्राश, मुरब्बा, हर्बल प्रोडक्ट आदि की मांग बढ़ रही है। लोगों में आयुर्वेदिक उत्पादों का चलन लगातार बढ़ रहा है। बाजारों में रंग-बिरंगे मैट्स की अच्छी रेंज उपलब्ध है तो योग के लिए आउटफिट भी खूब बिक रहा है। तीन सौ रुपए में योग के लिए आसानी से टी-शर्ट मिल रही है। बड़े आयोजनों के लिए आयोजक टीशर्ट प्रिंट करा लेते हैं। टी-शर्ट के साथ ही बैनर, पोस्टर्स के बाजार का भी इससे विस्तार हुआ है।

योग एक शारीरिक और आध्यात्मिक प्रकिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाकर जीवन को बेहतर और स्वस्थ बनाने की कोशिश की जाती है। यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म,जैन धर्म और हिंदू धर्म में ध्यान प्रक्रिया से सम्बंधित भी है। योग से अब दुनिया भर के लोग परिचित हैं। ब्रांड योगा भारत से निकलकर दुनिया भर में फैल गया है। यह अब सिर्फ भारत और हिंदुत्व तक ही सीमित नहीं रह गया है, यह एक विशाल बाज़ार बन चुका है, जहां योग चटाई बनाने वालों से लेकर योग सिखाने वालों तक की चांदी हो रही है।

बाबा रामदेव से पहले तिरुमिलाई कृष्णमचारी को आधुनिक योगगुरु माना जाता है। उन्होंने विन्यास योग शैली का इस्तेमाल किया और हठ योग का पुनरुद्धार किया। उन्हें आयुर्वेद और योग दोनों की खासी जानकारी थी। तिरुमिलाई को दिल की धड़कन पर नियंत्रण की महारत हासिल थी।

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शिवानंद पेशे से एक डॉक्टर थे। उन्होंने एक योगी की 18 खासियतों के बारे में लिखा था। उनके मुताबिक एक योगी मज़ाकिया स्वभाव का होना चाहिए। हठ योग, कर्म योग और मास्टर योग को मिलाकर उन्होंने त्रिमूर्ति योग का सूत्र तैयार किया। टी कृष्णमचारी के वो शुरुआती शिष्यों में से एक थे। बचपन में वो कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त और काफी कमज़ोर थे। उन्होंने पतंजलि योग सूत्र को नए ढंग से व्याख्यायित किया। निधन से पहले 95 साल तक की उम्र में वो शीर्षासन करते थे। कृष्ण पट्टाभी जोयीस भी एक बड़े योगगुरु थे। उन्होंने अष्टांग विन्यास योग शैली विकसित की थी। उनके अनुयायियों में मडोना, स्टिंग और ग्वेनेथ पाल्ट्रो जैसे बड़े नाम शुमार थे। भारत के साथ अब तो जैसे पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने लगी है।

योग का प्रचार-प्रसार बढ़ने से इससे जुड़ा बाजार ने तो ऐसा रूप ले लिया है कि पूरी दुनिया भौचक्की है। दुनिया भर में योग का बाजार करीब 5.45 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिसमें से अकेले अमरीका में ही 69 हजार करोड़ रुपए का योग से जुड़ी किताबों और एसेसरी का कारोबार हो रहा है। भारत में योग से जुड़ा कारोबार 12 हजार करोड़ रुपए के पार हो चुका है। देश के कॉरपोरेट सैक्टर में कार्यरत और फिटनेस के प्रति सचेत करीब 35 प्रतिशत युवा अन्य तरीके के बजाए योग को तरजीह देता है। एसोचैम सोशल डिवैलपैंमेंट फाउंडेशन द्वारा एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि ये युवा जिम, शारीरिक प्रशिक्षण, मुक्केबाजी, पिलेट्स, जुम्बा, डांस या अन्य तरह की किसी फिटनेस प्रक्रिया में जाने की बजाय योग क्लास में जाना पसंद कर रहे हैं। दुनिया भर में योगा इंडस्ट्री का मू्ल्य 8000 करोड़ डॉलर (5.45 लाख करोड़ रुपए) है।

अकेले अमेरिका में ही यह इंडस्ट्री 3000 करोड़ डॉलर की है। दुनिया में 170 से ज्यादा राष्ट्र 21 जून को हर साल इंटरनेशनल योगा डे मना रहे हैं। 2.04 करोड़ अमरीकी योगाभ्यास करते हैं, साल 2008 में यह संख्या 1.58 करोड़ थी। साल 2015 और 2016 में भारत ने इंटरनेशनल योगा डे मनाने के लिए 34.50 करोड़ रुपए खर्च किए थे। भारत में अभी दो लाख योग इंस्ट्रक्टर हैं और पांच लाख योग इंस्ट्रक्टर्स की आवश्यकता है। तीन हजार भारतीय योग टीचर्स चीन में सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय योग के पांच से 25 हजार रुपए तक की राशि हर महीने खर्च कर रहे हैं।

बाबा रामदेव के योगा कैम्प में 1,000 से 2,000 रुपए फीस चार्ज की जा रही है। अभी राजस्थान के कोटा में जो एक लाख लोगों के साथ बाबा रामदेव के योगा की खबरें आई हैं, उसके पीछे अच्छी-खासी धनराशि जुटाने की भी सूचनाएं हैं।

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