रायपुर, 22 अगस्त 2020

23 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जन्मदिन है। लेकिन उनके जन्मदिन से कई दिन पहले ही उनके समर्थक और कार्यकर्ता उन्हें जन्मदिवस की बधाई देने लगे हैं। शहर की सड़कें हों या फिर अखबारों के पन्ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की अग्रिम बधाई के संदेशों से भरे पड़े हैं। ऐसा सिर्फ राजधानी रायपुर में ही नहीं हो रहा है, बल्कि दूर-दराज के जिलों, शहरों और कस्बों तक में देखने को मिल रहा है। यहां तक कि तमाम गांवों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जन्मदिन की अग्रिम शुभकामनाओं वाले आदमकट कटआउट लगे हुए हैं। इसे आप कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सीएम के समर्थकों का अति उत्साह कह सकते हैँ। लेकिन मेरा मानना कुछ अलग है।

दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 68 सीटें दिलाकर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लाने का सेहरा भूपेश बघेल के सिर पर ही सजा है। भूपेश बघेल तब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हुआ करते थे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने 15 साल से प्रदेश में जमी हुई भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंका। भूपेश चुनावी रैलियों के दौरान भाजपा की तमाम अच्छी और कल्याणकारी योजनाओं के होने के बावजूद जनता को ये भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि छत्तीसगढ़ के विकास का रास्ता गगनचुंबी अट्टालिकाओं और चमचमाते शहरों से होकर नहीं बल्कि गांवों से होकर गुजरता है। गांव, गरीब और किसान के उत्थान की उनकी बातों को छत्तीसगढ़ की आम और  ग्रामीण जनता ने हाथों हाथ लिया। रमन सिंह की संचार क्रांति योजना को ठप करते हुए जनता ने हाथ पर बटन दबा दिया। दिसंबर 2018 में प्रदेश में कांग्रेस के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री पद की शपथ  लेने के बाद भूपेश बघेल ने एक के बाद एक कई ऐसी योजनाएं शुरु कीं, जिनके बारे में इससे पहले किसी सरकार ने न तो सोचा था और न ही उन पर कभी अमल करने की कोशिश की थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद को किसान हितैषी सीएम बनाकर जनता के सामने पेश किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और छत्तीसगढ़िया अस्मिता को विश्व पटल पर पहुंचाने के लिए लोक संस्कृति को बढ़ावा देने का सबसे पहला काम किया। नतीजा छत्तीसगढ़िया जनता ने सीएम के इस नजरिये को सिर आंखों पर बिठा लिया। मुख्यमंत्री ने गांव, गरीब और किसान की बेहतरी के लिए नया छत्तीसगढ़ी मॉडल तैयार किया। जिसकी शुरुआत नरवा, घुरवा, गरवा, बाड़ी- छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नारे से की गई।
ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े भूपेश बघेल ये जानते थे कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ गांवों में बसती है। खेती-किसानी को अगर लोगों के लिए फायदेमंद बना दिया गया तो फिर प्रदेश दिन-दूनी रात चौगुनी तरक्की करने लगेगा। किसानों के कर्ज माफ, बिजली बिल हाफ जैसे वादों को पूरा करने के लिए भूपेश बघेल ने हजारों करोड़ का कर्जा लिया। लेकिन इस कर्जे को लेने के पीछे किसी घोटाले की मंशा नहीं बल्कि प्रदेश के अन्नदाता को राहत पहुंचाने की थी। गांव, गौठान, गोबर, रोका-छेका, हरेली, तीजा, छठ ये सब छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अमिट अंश हैँ। भूपेश बघेल ने इन शब्दों को योजनाओं के रूप में जनता तक पहुंचाना शुरु कर दिया। पहले ही साल में 5 नए शासकीय अवकाशों की घोषणा करके छत्तीसगढ़िया महिलाओं का दिल जीत लिया। धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने, बोनस के अंतर की राशि देने,  आदिवासियों, वनवासियों, तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में राशि पहुंचाकर उन्होंने एक तरह से अपने किये वादों की फेहरिस्त को एक-एक करके पूरा करना शुरु कर दिया। कोना वायरस वैश्विक महामारी के काल में भी प्रदेश में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद कम बेरोजगारी दर दर्ज की गई। कोरोना संकट में मनरेगा का काम ज्यादा बढ़ाकर मजदूरों को वापस राज्य लौटने पर मजबूर कर दिया।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोबरधन योजना से गांव के किसानों को जोड़कर उनके लिए आय का साधन तैयार कर दिया।    बस्तर संभाग में वर्षों से लंबित बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना का काम आगे बढ़ा है। इस योजना के बनने से लगभग तीन लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा मिलेगी। समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले लघुवनोपज की संख्या 7 से बढ़ाकर 31 कर दी गई है। तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर प्रति मानक बोरा 2500 रूपए से बढाकर 4000 रूपए की गई है, जो देश में सर्वाधिक है। तेन्दूपत्ता श्रमिकों को वर्ष 2018 में तेन्दूपत्ता लाभांश के रूप में 232 करोड़ रूपए की राशि उनके खातों में डाली गई है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए शहीद महेन्द्र कर्मा सामाजिक सहायता योजना भी शुरू की गई है। इस योजना में तेन्दूपत्ता संग्राहकों को प्रीमियम राशि नहीं देनी होगी। लगभग साढे़ 12 लाख संग्राहक परिवारों को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार कृषि और वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ प्रदेश के पिछड़े इलाकों में उद्योगों की स्थापना की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
राज्य सरकार द्वारा अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा, छोटे भूखंडों के पंजीयन और भूमि की खरीदी बिक्री की गाइड लाइन में 30 प्रतिशत की छूट जैसे निर्णय लिए जाने से शहरों की अर्थव्यवस्था में गति आयी है। शहरों में रिक्त भूमि का व्यावसायिक इस्तेमाल, मेडिकल कालेजों की स्थापना जैसे अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, हाट बाजार क्लिनिक योजना, शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना जैसे बड़े कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस की 73वीं वर्षगांठ पर प्रदेशवासियों को अनेक सौगातें दी है। इनमें ‘डॉ. राधाबाई डायग्नोस्टिक सेंटर योजना’, जैसी महत्वपूर्ण योजना भी शामिल है। जिसमें रियायती दरों पर पैथोलॉजी तथा अन्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। स्कूली बच्चों की पढ़ाई के लिए ‘पढ़ई तुंहर दुआर‘ में समुदाय की सहभागिता से ‘पढ़ई तुंहर पारा‘ योजना‘ और घर पहुंच नागरिक सेवाएं देने के लिए ’मुख्यमंत्री मितान योजना’ शुरू की जाएगी। विद्युत के पारेषण-वितरण तंत्र की मजबूती के लिए ‘‘मुख्यमंत्री विद्युत अधोसंरचना विकास योजना भी प्रारंभ की जाएगी। इसी प्रकार ‘महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, मरवाही में महंत बिसाहू दास जी के नाम से उद्यानिकी महाविद्यालय सहित 4 नए उद्यानिकी कॉलेज तथा एक खाद्य तकनीकी एवं प्रसंस्करण कॉलेज, दुग्ध उत्पादन और मछली पालन को बढ़ावा देने 3 विशिष्ट पॉलीटेक्निक कॉलेज भी खोले जाएंगे। राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है। राम वन गमन पथ विकसित करने के लिए 137 करोड़ रूपए का कॉन्सेप्ट प्लान तैयार किया गया है, जिस पर काम शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उठाए जा रहे कदमों से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था मजबूती की ओर बढ़ रही है। गांधी के ग्राम स्वराज को साकार करने की दिशा में प्रयासरत भूपेश बघेल को इतना सब कुछ करने पर अगर उनके समर्थक, कार्यकर्ता अगर जन्मदिन से पहले ही अग्रिम बधाई देने का तांता लगा रहे हैं तो ये उनके जननायक बनने का सबसे बड़ा सबूत है।

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