महज खानापूर्ति जैसा दिख रहा छत्तीसगढ़ी राजभाषा

मुंगेली। छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस 28 नवम्बर को है। जनभाषा से राजभाषा बने मातृभाषा-छत्तीसगढ़ी को 13 वर्ष हो गए। फिर भी अब तक न तो छत्तीसगढ़ी में कामकाज ही हो रहा है और न ही पढ़ाई -लिखाई। किन्तु इसी छत्तीसगढ़ में निवासरत बंगबंधु-समुदाय ने अपनी मातृभाषा-बंगाली की पढाई-लिखाई कराने दो महीने तक आन्दोलन व आमरण-अनशन द्वारा तत्कालीन सरकार की चूलें हिला दी थीं।बंगाली में पढ़ाई-लिखाई कराने तब सरकार बाध्य भी हो गई थी। इसी बात का रोना-धोना हर जानकार छत्तीसगढ़िया करता है। सरकार की हर प्रकार से मजम्मत करने लगता है। पर वह यह भूल जाता है कि प्रखर भाषा-भक्ति के बिना किसी भी भाषा का संरक्षण-सम्वर्धन संभव ही नहीं। अपनी भाषा के लिए बंगबंधु-समुदाय ने कितना बलिदान दिया है, यह छत्तीसगढ़ियों को स्मरण होना चाहिए। जिस जज्बे की ताकत से बंग-भाषियों ने दुनिया के नक़्शे में एक नया स्वतन्त्र बंगला-देश निर्माण कर दिया, क्या वह जज्बा छत्तीसगढ़ियों में कभी जागेगा?

छत्तीसगढ़ सक्रिय पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष मनीष शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढी 2 करोड लोगों की मातृभाषा है। यह पूर्वी हिन्दी की
प्रमुख बोली है और छत्तीसगढ राज्य की प्रमुख भाषा है। राज्य की 82.56 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में तथा शहरी क्षेत्रों में केवल 17 प्रतिशत लोग रहते हैं। यह निर्विवाद सत्य है कि छत्तीसगढ़ का अधिकतर जीवन छत्तीसगढी के सहारे गतिमान
है। यह अलग बात है कि गिने-चुने शहरों के कार्य-व्यापार
राष्ट्रभाषा हिन्दी व उर्दू, पंजाबी, उडिया, मराठी, गुजराती, बाँग्ला,
तेलुगु, सिन्धी आदि भाषा में एवं आदिवासी क्षेत्रों में हलबी,
भतरी, मुरिया, माडिया, पहाडी कोरवा, उराँव आदि बोलियो के
सहारे ही संपर्क होता है। इस सबके बावजूद छत्तीसगढी ही ऐसी
भाषा है जो समूचे राज्य में बोली, व समझी जाती है। एक तरह
से यह छत्तीसगढ राज्य की संपर्क भाषा है। वस्तुतः छत्तीसगढ
राज्य के नामकरण के पीछे उसकी भाषिक विशेषता भी है।

श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़़ी को केवल एक भाषा विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करना ‘महतारी-भाषा -छत्तीसगढ़़ी’ के पीठ में छुरा भोंकने के समान है। यह अपराध हर पढ़ा-लिखा छत्तीसगढ़िया करता है। महतारी भाषा प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम होती है। इसी माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। इसके अलावा देश-दुनिया में किसी भाषा में शुरूआती शिक्षा नहीं दी जाती है। केवल छत्तीसगढ़ में ही एक विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाता है। मनीष शर्मा ने राज्य सरकार से मांग की कि जल्द प्रारंभिक शिक्षा छत्तीसगढ़ी में देने का इंतजाम करे।

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By Admin

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