पटना, 21 अगस्त 2020

बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए वोटरों और जातियों की गोलबंदी शुरु हो गई है। इस कड़ी  लालू की पार्टी आरजेडी ( राष्ट्रीय जनता दल) ने दलित नेताओ की पूरी फौज मैदान में उतार दी है। आरजेडी के नेता नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते रहे हैं। इसी आरोप को भुनाने के लिए आरजेडी ने दलित कार्ड खेल दिया है।

आरजेडी ने लालू-राबड़ी के जमाने में सहयोगी रहे पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतार दिया है। आरजेडी के पूर्व सभापति रहे उदय नारायण चौधरी, पूर्व मंत्री रमई राम और श्याम रजक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नीतीश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरजेडी नेताओं ने नीतीश सरकार पर गरीब और दलित बच्चों की स्कॉलरशिप बंद करने का आरोप लगाकर जेडीयू को दलित विरोधी सरकार कहा है।

रमई राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नीतिश राज में दलितों को खेती के लिए दी गई जमीन पर आज तक कब्जा नहीं मिला। श्यम रजक ने जेडीयू सरकार में दलितों पर अत्याचार बढ़ने के आरोप लगाये हैं।

आरजेडी नेताओं के आरोपों पर जेडीयू प्रवक्ता संतोष निराला ने पलटवार किया है। निराला ने कहा कि नीतिश सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाने वालों में अगर दम है तो किसी दलित को सीएम पद का उम्मदवार घोषित करके दिखाएँ।

बिहार चुनाव से पहले दलितो का मुद्दा इसलिये गरमाया हुआ है कि आरजेडी से जीतनराम मांझी ने नाता तोड़ लिया है। जीतनराम मांझी के जाने से आरजेडी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दलितों को मुद्दा बनाकर नीतीश सरकार को घेरा जा रहा है। इसी कड़ी में पूर्व दलित नेताओं को पार्टी का मुखौटा बनाकर पेश किया गया है।

0Shares
loading...

You missed